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(बुंदेलखंड महोबा)रतौली गांव में भावुक विदाई: सेवानिवृत्त शिक्षक भूपेंद्र राजपूत को बच्चों ने रोते हुए किया विदा



EDITOR - RAJEEV TIWARI

महोबा जनपद के विकासखंड कबरई के रतौली गांव में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व माध्यमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक भूपेंद्र राजपूत के सेवानिवृत्त होने पर बच्चों ने भावनात्मक रूप से उन्हें विदाई दी। शिक्षक और छात्रों के बीच गहरा संबंध होने के कारण यह पल पूरे गांव के लिए भावुकता से भर गया।भूपेंद्र राजपूत, जो वर्ष 2008 से इस विद्यालय में बतौर व्यायाम शिक्षक कार्यरत थे, अपनी शिक्षा पद्धति और स्नेहिल व्यवहार के कारण छात्रों के दिलों में विशेष स्थान बना चुके थे। वे न केवल विद्यार्थियों को शिक्षित करने में तत्पर थे, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण में भी अहम भूमिका निभाते रहे। खेल, व्यायाम और अनुशासन के साथ-साथ उन्होंने बच्चों को नैतिकता और मूल्यों की शिक्षा भी दी।विद्यालय में भूपेंद्र राजपूत के सेवानिवृत्ति समारोह का आयोजन किया गया, तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। बच्चों ने उन्हें फूलमालाओं से सम्मानित किया और अपने प्रिय शिक्षक को विदा करते समय भावुक हो गए। जैसे ही उन्होंने अपने अनुभव और यात्रा को साझा किया, बच्चों की आंखों से आंसू छलक पड़े। बच्चों को रोता देख शिक्षक भी अपने आंसू नहीं रोक पाए और सभी की आंखें नम हो गईं। विद्यालय के अन्य शिक्षक, प्रधानाध्यापक और गांव के सम्मानित लोग भी इस समारोह में उपस्थित थे। सभी ने भूपेंद्र राजपूत की शिक्षण यात्रा की सराहना की और उनके योगदान को याद किया। विद्यालय में उनके सहयोगियों ने कहा कि उनका अनुशासन, समर्पण और विद्यार्थियों के प्रति प्रेम हमेशा याद किया जाएगा।

विद्यालय के बच्चों ने भावनात्मक शब्दों में अपने शिक्षक के प्रति आभार व्यक्त किया। एक छात्र ने कहा कि सर ने हमें सिर्फ किताबों की शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर सही राह दिखाने का काम किया। हम उन्हें कभी नहीं भूल सकते।

अभिभावकों ने भी भूपेंद्र राजपूत के योगदान की सराहना की और कहा कि उन्होंने शिक्षा को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक सेवा के रूप में अपनाया। उनके मार्गदर्शन में कई छात्र उच्च शिक्षा और अच्छे संस्कार प्राप्त कर आगे बढ़े हैं।

अपने 28 वर्षों के शिक्षण जीवन में भूपेंद्र राजपूत ने कई पीढ़ियों को शिक्षित किया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। उनके जाने से विद्यालय में एक खालीपन जरूर आएगा, लेकिन उनकी शिक्षाएं और उनके द्वारा स्थापित मूल्य हमेशा बच्चों और विद्यालय परिवार के साथ रहेंगे।

यह विदाई केवल एक समारोह नहीं थी, बल्कि यह उस प्यार, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का प्रमाण थी जो उन्होंने अपने विद्यार्थियों से पाया।

विद्यालय के शिक्षकों और बच्चों ने मिलकर उन्हें विदाई दी और उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। इस अवसर पर उन्हें उपहार स्वरूप स्मृति चिन्ह और शुभकामनाओं से भरी एक पुस्तक भेंट की गई।

उनका यह योगदान हमेशा याद रखा जाएगा, और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

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