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(बुंदेलखंड महोबा)जैतपुर सीएचसी में मरीजों का आर्थिक शोषण जारी, डॉक्टरों पर बाहर की दवा लिखने और डिलीवरी में रिश्वत के आरोप, चिकित्सा अधिकारी पर लग रहे गंभीर आरोप


 

EDITOR- RAJEEV TIWARI

महोबा जनपद के जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का आर्थिक शोषण थमने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाएं लिखने और डिलीवरी के दौरान खुलेआम रिश्वत लेने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगने की बात कही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते मरीजों का शोषण लगातार जारी है।लेवा गांव निवासी प्रबल ने बताया कि वह अपनी बच्ची का इलाज कराने जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था। डॉक्टर पवन राजपूत ने उसे निशुल्क इलाज देने के बजाय बाहर की महंगी दवाएं लिख दीं। प्रबल ने निराशा जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल से मुफ्त इलाज की उम्मीद थी, लेकिन डॉक्टरों की मिलीभगत से मरीजों को बाहर की दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।इसी तरह बछेछरगांव निवासी ठाकुरदास ने भी शिकायत की कि इलाज के दौरान उसे अस्पताल में उपलब्ध दवाएं न देकर बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दवा खरीदने को कहा गया। ठाकुरदास का कहना है कि गरीब मरीज मजबूरी में बाहर की दवा खरीदने को विवश हैं, क्योंकि इलाज कराना उनकी जरूरत है। बुंदेलखंड किसान यूनियन के नेता बालाजी ने आरोप लगाया कि जैतपुर अस्पताल में भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बाहर की दवा लिखने के अलावा गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के दौरान भी 1500 से 3000 रुपये तक की रिश्वत खुलेआम ली जा रही है। विरोध करने पर मरीजों को इलाज से वंचित कर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। बालाजी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं कसी गई तो किसान संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर आसाराम ने पूरे मामले में अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैतपुर के चिकित्सा अधिकारी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते कमीशनखोरी का यह खेल लंबे समय से चल रहा है और मरीजों का आर्थिक शोषण जारी है।सवाल यह है कि क्या सीएमओ की ओर से की गई औपचारिक कार्रवाई से इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा या फिर यह खेल यूं ही जारी रहेगा? आने वाला समय ही इसका जवाब देगा।

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